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Covid-19: The worst situation in the world so far in Delhi in case of rising corona cases | Covid-19: दुनिया में अब तक की सबसे खराब स्थिति दिल्ली में, एक-एक निजी अस्पताल की जांच करेंगी गृह मंत्रालय की टीमें



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नवंबर माह में कोरोना के बढ़ते केसों के मामले में भारत ही न हीं दुनिया में अब तक की सबसे खराब स्थिति दिल्ली में है। इंडिया टुडे डेटा इंटेलीजेंस यूनिट (DIU) की रिपोर्ट के मुताबि​क इस महीने की शुरुआत के बाद से कई दिनों पर दिल्ली के दैनिक कोविड आंकड़ों की स्थिति काफी चिंता वाली है। ये आंकड़े दुनिया भर में किसी भी शहर की ओर से देखे गए सबसे बुरे 10 दिनों के आंकड़ों में शामिल हैं। बता दें कि DIU द्वारा जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी (JHU) के कई देशों के उपलब्ध डेटा का विश्लेषण करने पर यह स्थिति सामने आई। 

इन हालातों में नई दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दलों का गठन किया है। ये दल दिल्ली में स्थित सभी निजी अस्पतालों में पहुंचेंगे और कोविड-19 मरीजों की जांच और इलाज को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी विभिन्न दिशा-निर्देशों के पालन की स्थिति की जांच करेंगे। गृह मंत्रालय ने कहा है कि ये दल तत्काल प्रभाव से अपना काम शुरू करेंगे और दो दिन के अंदर विशिष्ट जानकारियों के साथ अपनी रिपोर्ट जमा करेंगे। बता दें कि नई दिल्ली में कोविड-19 की स्थिति को देखते हुए रविवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और दिल्ली सरकार के बीच संयुक्त बैठक का आयोजन हुआ था।

दिल्ली में दोगुनी होगी कोरोना जांच
इस बैठक में दिल्ली में जल्द ही आरटी-पीसीआर तकनीक से कोरोना वायरस की जांच दोगुनी करने के निर्देश जारी किए गए थे। इनके अलावा स्वास्थ्यकर्मियों की कमी को देखते हुए सीएपीएफ से अतिरिक्त डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ देने की अनुमति दी गई थी। ये कर्मचारी जल्द ही एयरलिफ्ट करके दिल्ली लाए जाएंगे। दैनिक नए केसों के ऊंचे आंकड़े वाले दिनों की बात की जाए तो ब्राजील का साओ पाउलो शहर ही दिल्ली के कहीं करीब टिकता है। अगस्त के महीने में तेज बढ़ोतरी के दौरान साओ पाउलो ने ये दिन देखे। न्यूयॉर्क में अप्रैल के महीने में तेज बढ़ोतरी के दौरान ऐसे कई दिन देखे जब 5,000 से अधिक केस रिपोर्ट हुए। लेकिन 11 नवंबर को दिल्ली ने जो 8,593 नए केस देखे, उतने दुनिया के किसी भी और शहर ने एक दिन में नहीं देखे।

दिल्ली में 10 नवंबर को 7,830, 13 नवंबर को 7,802 और 8 नवंबर को 7,745 केस रिपोर्ट हुए। अमेरिका की काउंटीज की बात की जाए तो टेक्सास ने 21 सितंबर को 10,000 से अधिक केस रिपोर्ट किए लेकिन ये ऊंचा आंकड़ा बैकलॉग रिपोर्टिंग की वजह से था। ब्राजील के शहरों में साओ पाउलो के बाद रियो डी जनेरियो अगले स्थान पर आता है, लेकिन ये साओ पाउलो या दिल्ली के आंकड़ों की तुलना नहीं कर सकता।

न्यूयॉर्क और साओ पाउलो भी पीछे
अलग-अलग दिनों की गणना भ्रामक हो सकती है- एक दिन का उछाल शहर के ओवरऑल ट्रेंड की गलत नुमाइंदगी कर सकता है। और तुलनात्मक रूप से ऊंचे आंकड़े वाले दिन ऐसा आभास दे सकते हैं कि सबसे अधिक प्रभावित शहरों में आउटब्रेक तुलनात्मक आकार के थे। लेकिन अगर ये शहर अलग-अलग दिनों पर तुलनात्मक हों तो दिल्ली के सतत मौजूदा उछाल ने न्यूयॉर्क शहर और साओ पाउलो को पीछे छोड़ दिया है।

दिल्ली का सात दिवसीय औरसत 87
हालांकि, दिल्ली को मौजूदा स्थिति में मृत्यु दर में जिस वृद्धि का सामना है, वो अभी भी न्यू यॉर्क की उस मृत्यु दर से कम है जो उसने महामारी की शुरुआत में देखी थी। दिल्ली की मौजूदा सात-दिवसीय औसत 87 है, जून के मध्य में ये 133 के अपने उच्च स्तर तक पहुंच गई थी। अपने शिखर पर, न्यूयॉर्क सिटी में अप्रैल की शुरुआत में दैनिक मृत्यु का औसत 567 था। साओ पाउलो का जहां तक सवाल है तो ये औसत जून में 110 था। दिल्ली जो देख रही है वो दुनिया के किसी भी शहर के लिए सबसे ऊंचा उछाल हो सकता है, लेकिन ये दुनिया में सबसे घातक होने से अब भी दूर है।
 



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